Sunday, September 3, 2017

यूपी : RTI कार्यकर्ताओं ने ‘येश्वर्याज’ के बैनर तले धरना दे फूँका सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट का पुतला l







लखनऊ/ 03-09-2017

लखनऊ के सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ की मुहिम के परिणामस्वरूप अरविंद सिंह बिष्ट द्वारा सूचना आयुक्त के रूप में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्य के पर्यवेक्षण को हितों के टकराव के सिद्धांत के खिलाफ पाए जाने के बाद  विगत दिनों सूचना आयोग द्वारा बिष्ट को लखनऊ विकास प्राधिकरण संबंधी मामलों से विलग कर दिए जाने से उत्साहित यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आज लखनऊ के धरना स्थल लक्ष्मण मेला मैदान में सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ के बैनर तले समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में धरना देकर सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट और इनके परिवार पर धोखाधड़ी,भ्रष्टाचार,जमीनों के अवैध कारोबार और मनीलॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए और सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट को निलंबित कर आरटीआई एक्ट की धारा 17 में जांच कराने के साथ-साथ सतर्कता जांच कराने की मांग बुलंद करते हुए अरविन्द सिंह बिष्ट का पुतला फूँका और जिला प्रशासन के माध्यम से सूबे के राज्यपाल और सीएम को 3 सूत्रीय मांगों वाले ज्ञापन भेजे l

कार्यक्रम के समन्वयक तनवीर अहमद सिद्दीकी ने सूचना आयुक्त  द्वारा अपनी पत्नी अम्बी बिष्ट वर्तमान उप सचिव - लखनऊ विकास प्राधिकरण  के साथ फर्जीबाड़ा करके लखनऊ विकास प्राधिकरण की ट्रांसगोमती चाँदगंज योजना में 12 हज़ार वर्गफुट के भूखंड का पट्टा कराने की जालसाजी की ख़बरों के आधार पर बिष्ट की भर्त्सना की l

कार्यक्रम की आयोजिका उर्वशी शर्मा ने बताया कि ‘येश्वर्याज’ लखनऊ स्थित एक अपंजीकृत सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र  में कार्यरत है l विगत दिनों अरविन्द सिंह बिष्ट से एलडीए का कार्य हटाये जाने को अपने संगठन ‘येश्वर्याज’ के प्रयासों का परिणाम बताते हुए उर्वशी ने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है कि बिष्ट परिवार ने  भ्रष्टाचार और जालसाजी से लखनऊ के  विराटखंड गोमतीनगर,विराजखण्ड गोमतीनगर,शारदानगर योजना रत्नखण्ड,UPSIDC के कुर्सीरोड स्थित इंडस्ट्रियल एरिया,नेहरू एन्क्लेव,मोहनलालगंज,बख्शी का तालाब,सीतापुर रोड,विश्वास खंड,टीजी चाँदगंज योजना,गोमतीनगर विस्तार,वास्तु खंड,रुचिखण्ड,विकासखंड,कानपुर रोड योजना की कई दर्जनों संपत्तियों के अलावा लखनऊ के बाहर भी अवैध स्रोतों से संपत्तियां अर्जित कीं हैं और ये परिवार मनीलॉन्ड्रिंग के साथ-साथ जमीनों का अवैध कारोबार करने में भी संलिप्त है ।

उर्वशी  ने बताया कि यह मामला पूरे सूबे की जनता को प्रभावित करने वाला मामला है और इसीलिये आज वे अपने साथियों के साथ धरना देकर यूपी के राज्यपाल द्वारा अरविन्द सिंह बिष्ट को आरटीआई एक्ट की धारा 17(2) के तहत तत्काल निलंबित किये जाने,यूपी के राज्यपाल को अरविन्द सिंह बिष्ट के खिलाफ अब तक प्राप्त सभी शिकायतों का निस्तारण आरटीआई एक्ट की धारा 17 में विहित प्रक्रिया का पालन कर तत्काल कराने और अरविन्द सिंह बिष्ट और इनके  परिवार की धोखाधड़ी,भ्रष्टाचार,जमीनों के  अवैध कारोबार और मनीलॉन्ड्रिंग की अनियमितता के समाचारों का यूपी के मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने  और  प्रकरण में  सतर्कता जांच संस्थित कराये जाने की 3 सूत्रीय मांगों को सार्वजनिक रूप से उठा रही हैं l

धरने में रवीन्द्र कुमार मिश्र,सैयद नईम अहमद,राम स्वरुप यादव,ज्ञानेश पाण्डेय,अशोक कुमार शुक्ल,श्याम मनोहर बाजपेयी,के.के.मिश्र,नागेन्द्र सिंह,देवी दत्त पाण्डेय,आनंद प्रसाद,पुरुषोत्तम शुक्ल,फुरकान,उवैद खान,अशफाक खान,मो. फरहान,बिलाल,जितेन्द्र यादव,अशोक यादव,पी.सी.पाठक,संजय कुमार पाठक,दिलीप पाठक,हरपाल सिंह,नानक चन्द्र,ज्ञान प्रकाश,आर.आर. जैसवार समेत लखनऊ,प्रतापगढ़,फरुक्खाबाद,शाहजहांपुर, बदायूं, देहरादून,उन्नाव आदि जिलों के अनेकों आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया l



Friday, September 1, 2017

येश्वर्याज’ का यूपी सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्ट के खिलाफ धरना – प्रदर्शन





सामाजिक संगठनयेश्वर्याजके तत्वावधान में
उत्तर प्रदेश सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्ट और इनके परिवार की अनियमितताओं के विरोध में
धरना – प्रदर्शन
स्थान : धरना स्थल,लक्ष्मण मेला मैदान,लखनऊ
दिनांक : 03 सितम्बर 2017  दिन  :  रविवार
समय : 12:00 बजे दोपहर से 02:00 बजे अपराह्न तक
-: मांगें  :-
1)            यूपी के राज्यपाल द्वारा अरविन्द सिंह बिष्ट को आरटीआई एक्ट की धारा 17(2) के तहत तत्काल निलंबित किया जाए l
2)            यूपी के राज्यपाल के कार्यालय में अरविन्द सिंह बिष्ट के खिलाफ अब तक प्राप्त सभी शिकायतों का निस्तारण आरटीआई एक्ट की धारा 17 में विहित प्रक्रिया का पालन कर तत्काल कराया जाए l
3)            अरविन्द सिंह बिष्ट और इनके  परिवार की धोखाधड़ी,भ्रष्टाचार,जमीनों के  अवैध कारोबार और मनीलॉन्ड्रिंग की अनियमितता के समाचारों का प्रदेश सरकार द्वारा संज्ञान लिया जाए और  प्रकरण में  सतर्कता जांच संस्थित कराई जाए l
आयोजिका : उर्वशी शर्मा ( समाजसेविका एवं आरटीआई एक्टिविस्ट )
संपर्क मोबाइल : 8081898081, 9369613513

ई-मेल : rtimahilamanchup@gmail.com

Sunday, August 20, 2017

एक्टिविस्ट्स का डेथ-वारंट बताते हुए केंद्र और UP की RTI नियमावलियों को जलाकर उठाई गई सुधार की मांग l






लखनऊ/20 अगस्त 2017

2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है ।  लखनऊ की समाजसेविका और सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ की सचिव उर्वशी शर्मा का मानना है कि केंद्र और राज्यों की सरकारें जब देश भर के आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाए गए जनदबाब के चलते सीधे-सीधे आरटीआई एक्ट में बदलाव करके एक्ट को कमजोर करने के मंसूबों में सफल नहीं हो पाई तो उन्होंने बैकडोर से आरटीआई नियमावलियों की आड़ लेकर RTI एक्ट को कमजोर करने की साजिश रचना शुरू कर दिया है l यूपी के आरटीआई कार्यकर्ता साल 2015 से ही लगातार इस साजिश के शिकार हो रहे हैं और केंद्र की नई आरटीआई नियमावली लागू होने के बाद पूरा देश इस प्रशासनिक साजिश का शिकार होगा l बकौल तनवीर अहमद सिद्दीकी , इसीलिये इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों पर विरोध प्रदर्शित करने के लिए सामाजिक  संगठन ‘येश्वर्याज’ ने आगे आकर लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थित धरना स्थल में  नियमावलियों की प्रतियाँ जलाकर धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया है और भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, मुख्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त तथा  यूपी के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और  मुख्य सूचना आयुक्त को ज्ञापन भेजकर   इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों  को समाप्त करने की माग उठाई है l

धरने में शामिल राम स्वरुप यादव  का मानना है कि इन नियमावलियों में आरटीआई की अर्जी देने वाले की मौत की स्थिति में मामला बंद करने और आरटीआई की प्रक्रिया खर्चीली करने जैसे प्रस्ताव हैं। हरपाल सिंह ने सरकार की इस कोशिश को आरटीआई कानून को बैक डोर से कमजोर करने की साजिश बताते हुए आशंका व्यक्त की है कि  नए बदलावों से आरटीआई के तहत सूचना पाना मुश्किल हो जाएगा।

आरटीआई एक्सपर्ट ज्ञानेश पाण्डेय कहते हैं कि देश की जनता को सूचना पाने का अधिकार काफी जद्दोजहद के बाद हासिल हुआ, लेकिन अब आरटीआई नियमावलियों के नाम पर  आवेदक की मौत होने पर मामला बंद कर देने,आवेदन को अधिकतम 500 शब्दों में देने, आरटीआई की फीस बढाने, पोस्टल खर्च आबेदक पर डालने और आरटीआई अर्जी देने वाले के खिलाफ काउंटर अपील देने का प्राविधान लागू करने से इस एक्ट को लाने की मूल मंशा की ही हत्या हो जायेगी ।

आरटीआई नियमावली में व्हिसिलब्लोअर की सुरक्षा का कोई भी प्रावधान नहीं किये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता रुवैद कमाल किदवई  ने इन नियमावलियों को आरटीआई की धार को कमजोर करने वाला, नागरिकों के मुकाबले भ्रष्ट सरकारी अफसरों की ताकत को बढ़ावा देने वाला और आम लोगों के लिए आरटीआई की प्रक्रिया को मंहंगा और जटिल बनाने वाला बताया है।

धरने में आये आरटीआई कार्यकर्ता पुरुषोत्तम शुक्ल, होमेंद्र कुमार, अरविन्द शुक्ल और राजकिशोर यादव भी इस बदलाव से काफ़ी नाराज़ दिखाई दिए और सभी ने सरकार पर आरटीआई क़ानून को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया l कार्यकर्ताओं के अनुसार   सरकार की नीयत साफ़ नहीं है और  उसने आम जनता के लिए सूचना का अधिकार पाना मुश्किल कर दिया है l

धरने में आरटीआई एक्टिविस्ट शमीम अहमद,अधिवक्ता मनीष,आनंद प्रसाद आदि ने प्रतिभाग  किया l कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि यदि 3 माह में उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उनका संगठन इस मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिक उपचार लेकर भारत में आरटीआई आन्दोलन को मजबूती देने के क्षेत्र में अपना योगदान देने का प्रयास करेगा  l